Airbus Planes & Solar Radiation Risk: आज हम आप को दे की क्या है 30 अक्टूबर के ब्लूजेट की फ्लाइट में हुए पिचडाउन की घटना ने एविएशन वर्ल्ड में हड़कंप मचा दिया है. एयरबस ने A320 फैमिली के सैकड़ों एयरक्राफ्ट को ग्राउंड कर दिया है. सभी एयरक्राफ्ट के सॉफ्टवेयर अपग्रेड किए जा रहे हैं. इस पूरे घटनाक्रम के बीच कई सवाल ऐसे हैं, जो हम सब के मन में कौंध रहे हैं. सबसे पहला और अहम सवाल यही है कि अचानक एयरबस को ही सूर्य से खतरा कैसे हो गया. साथ ही, इसका आज के समय से क्या कनेक्शन है. तो आइए एक्सपर्ट्स से जानते हैं, इन Sabhi सवालों के जवाब.
एयरबस इंजीनियर्स
एयरबस के विशेषज्ञों का कहना है कि उनके विमानों को इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि वे Space Radiation के बावजूद सुरक्षित रहें।
वे निगरानी रखते हैं:
नॉर्थ पोल के ऊपर से उड़ानों पर
सोलर स्टॉर्म अलर्ट्स पर
GPS deviation रिपोर्ट्स पर
आमतौर पर, सोलर गतिविधि बढ़ते ही एयरबस की टेक्निकल टीम लगातार डेटा की समीक्षा करती है।
Airbus Planes & Solar Radiation Risk: 30 अक्टूबर 2025 को कैनकून से न्यूयार्क जा रही ब्लूजेट का A320 प्लेन कुछ सेकेड्स के लिए पिच-डाउन हुआ. इस घटना में प्लेन में सवार करीब 15 पैसेंजर घायल हो गए. फ्रेंच एयरक्राफ्ट एक्सिडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (BEA) ने अपनी जांच इस घटना के लिए एलीवेटर एंड एइलरॉन कंप्यूटर (ELAC) को जिम्मेदार ठहराया. वहीं, एयरबस ने अपनी एनालिसिस में ELAC को सोलर रेडिएशन से जोड़ दिया. इसके बाद, यूरोपियन यूनियन एविएशन सेफ्टी एजेंसी (EASA) ने एक इमरजेंसी एयरवर्दिनेस डायरेक्टिव (ईएडी) जारी कर सभी एयरलाइंस को निर्देश दिया कि A320 फैमिली के प्लेन्स को ELAC सॉफ्टवेयर मॉडिफिकेशन के बिना उड़ने न दिया जाए
क्या यात्रियों को घबराने की जरूरत है?
बिल्कुल नहीं।
एयरबस सहित दुनिया के सभी विमान कई स्तर की सुरक्षा तकनीकों से लैस हैं।
सोलर स्टॉर्म या सूर्य की तेज गतिविधियों से कोई ऐसा खतरा नहीं होता कि विमान उड़ न सके या यात्रियों की जान जोखिम में आ जाए।
हां, कुछ स्थितियों में:
उड़ान रीरूट हो सकती है
कुछ मिनटों के लिए GPS accuracy कम हो सकती है
रेडियो कम्युनिकेशन कमजोर पड़ सकता है
लेकिन ये समस्याएँ अस्थायी होती हैं और पायलट तथा एयरलाइंस इनके लिए ट्रेनिंग प्राप्त होते हैं।
एयरबस की आधार क्या है?
वहीं, ईएडी को आधार बनाते हुए एयरबस ने भी एयरलाइंस ऑपरेटर्स के लिए अलर्ट ऑपरेटर्स ट्रांसमिशन जारी कर दिया. नतीजा यह हुआ कि एयरबस ने A320 फेमली के प्लेन को ग्राउंड कर दिया गया. इस डेवलपमेंट की वजह से भारत सहित पूरी दुनिया में फ्लाइट्स कैंसिलेशन का सिललिसा शुरू हो गया. अब इस घटना को लेकर पैसेंजर्स के दिमाग मे पहला सवाल यह है कि सोलर रेडिएशन फ्लाइट सेफ्टी के लिए खतरा कैसे हो सकती है. साथ ही, कौतूहल इस बात को लेकर मचा हुआ है कि रेडिएशन से सिर्फ एयरबस के प्लेन्स को ही खतरा क्यों है? सोलर एडिएशन हमेशा से मौजूद रही हैं तो अब वह खतरनाक कैसे हो गई. तो आइए सिलसिलेवार तरीके से जानते हैं, इस सवाल का एविएशन एक्सपर्ट्स के नजरिए से जवाब.
एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?
1. एविएशन साइंटिस्ट्स
उनका कहना है कि सोलर स्टॉर्म का सबसे बड़ा असर GPS और कम्युनिकेशन सिस्टम पर होता है।
किसी भी विमान की सुरक्षा में नेविगेशन बेहद महत्वपूर्ण होता है।
वे बताते हैं कि,
GPS में 5–50 मीटर तक की गलती आ सकती है
रेडियो सिग्नल अचानक बंद हो सकते हैं
वायुमंडलीय आयनाइजेशन बढ़ जाता है
इन परिस्थितियों में पायलट को मैन्युअल मोड में उड़ान संभालनी पड़ सकती है।
Conclusions ( निष्कर्ष )
सोलर रेडिएशन तो हमेशा से पर्यावरण का हिस्सा रहा है, अब ऐसा क्या हुआ कि वह इतना खतरनाक हो गईं?
सोलर रेडिएशन हमेशा से पर्यावरण का हिस्सा भी रहा है और एविएशन के लिए यह पुरानी और ज्ञात हकीकत है. एयरबस A320 का मौजूदा मामला एक स्पेसिफिक सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर की वल्नरेबिलिटी को लेकर है, जिसकी पहचान 30 अक्टूबर को हुई घटना के बाद की गई है, जो सोलर स्टॉर्म्स की वजह से ट्रिगर हुई है. आपको बता दें कि सूरज की एक्टिविटी 11 साल के सोलर साइकल के पीक पर है; नवंबर 2025 में X5.1 क्लास की शक्तिशाली सोलर फ्लेयर और उससे जुड़ी S2‑लेवल सोलर रेडिएशन स्टॉर्म, G4 लेवल की जियोमैग्नेटिक स्टॉर्म और ग्राउंड‑लेवल एनहांसमेंट जैसे इवेंट हाल में दर्ज किए गए, जिनसे हाई‑ ऐल्टिट्यूड और पोलर रूट्स पर रेडिएशन और रेडियो डिसरप्शन बढ़ा है.