Google फॉर्म आया, घबराए टीचर्स… क्या अब कुत्तों की जनगणना भी हम करेंगे? बेंगलुरु में शुरू हुआ नया सर्वे

टीचर्स:

बेंगलुरु में इन दिनों शिक्षकों के बीच एक अजीब सी चर्चा गर्म है—क्योंकि उन्हें एक ऐसा Google Form मिला है, जिसकी वजह से वे कन्फ्यूज़ भी हैं और परेशान भी। फॉर्म में उनसे आवारा कुत्तों की संख्या, लोकेशन और उनकी गतिविधियों से जुड़े सवाल पूछे गए हैं। सवाल उठ रहा है कि क्या अब शिक्षक कुत्तों की जनगणना भी करेंगे?

शिक्षक पहले से ही चुनाव ड्यूटी, सर्वे, जनगणना, सरकारी स्कीमों की मॉनिटरिंग और कई गैर-शैक्षणिक कामों का बोझ झेलते हैं। ऐसे में यह नया फॉर्म उनके बीच तनाव बढ़ाने वाला बन गया है। आइए समझते हैं पूरा मामला क्या है, यह सर्वे क्यों जारी किया गया और आखिर शिक्षकों में नाराज़गी क्यों बढ़ रही है।

बेंगलुरु में क्यों हो रहा है डॉग सर्वे?

कर्नाटक में पिछले कुछ समय से स्ट्रे डॉग्स की संख्या बढ़ने, डॉग-बाइट केसों में उछाल और कॉलोनियों में पालतू जानवरों की अनियंत्रित ब्रीडिंग को लेकर शिकायतें आती रही हैं। नगर निकाय BBMP (Bruhat Bengaluru Mahanagara Palike) ने जगह-जगह पालतू व आवारा कुत्तों की संख्या का डाटा इकट्ठा करने का फैसला किया है।

इस डाटा के आधार पर:

  • डॉग-बाइट केस कम करने की रणनीति बनेगी
  • जहां ज्यादा स्ट्रे डॉग्स हैं, वहां वैक्सिनेशन और ABC (Animal Birth Control) को तेज किया जाएगा
  • पालतू कुत्तों की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया सुधारी जाएगी
  • कचरा प्रबंधन और डॉग-फीडिंग जैसे मुद्दों पर नीति बनाई जाएगी

यानी सर्वे जरूरी है, लेकिन सवाल यह है कि यह काम शिक्षकों से क्यों कराया जा रहा है?

टीचर्स ने कहा—ये हमारा काम नहीं!

Google Form सामने आते ही शिक्षकों में चिंता फैल गई। कई शिक्षक सोशल मीडिया पर पूछते दिखे:

  • “हम पढ़ाएं या सर्वे करें?”
  • “पहले जनगणना, फिर चुनाव ड्यूटी… अब कुत्तों का सर्वे भी?”
  • “स्कूलों के पास पहले से स्टाफ कम है, बच्चों की पढ़ाई का क्या होगा?”

शिक्षकों का कहना है कि यह काम पशु पालन विभाग या नगर निगम के कर्मचारियों द्वारा किया जाना चाहिए। कई टीचर्स ने यह भी कहा कि गली-गली जाकर स्ट्रे डॉग्स की गिनती करना उनके लिए न तो सुरक्षित है और न उनके कार्यक्षेत्र में आता है।

फॉर्म में क्या पूछा गया?

Google Form में जिन जानकारियों की मांग की गई, वे कुछ इस तरह थीं:

  • आपके क्षेत्र/वार्ड में कुल आवारा कुत्तों की अनुमानित संख्या
  • पालतू कुत्तों की संख्या
  • क्या कुत्तों का वैक्सिनेशन हुआ है?
  • कुत्तों के आक्रामक होने की घटनाएं
  • स्कूल या मोहल्ले के पास डॉग-बाइट के मामले

यह जानकारी जुटाने के लिए शिक्षकों को फील्ड में जाकर डेटा देखने की जरूरत पड़ती है। यही कारण है कि कई शिक्षक यह जिम्मेदारी लेने से हिचक रहे हैं।

शिक्षकों पर पहले से ही भारी बोझ

भारत में शिक्षकों पर पढ़ाई के अलावा कई तरह की ड्यूटी डाली जाती रही हैं:

  • मतदान केंद्रों पर ड्यूटी
  • NGO और सरकारी योजनाओं के सर्वे
  • मिड-डे मील की मॉनिटरिंग
  • जनगणना और सामाजिक सर्वे

इससे पढ़ाई प्रभावित होती है और शिक्षकों का कार्यभार बढ़ता जाता है। कई राज्य पहले भी इस पर सवाल उठा चुके हैं कि गैर-शैक्षणिक कामों का बोझ कम किया जाए।

BBMP ने क्या कहा?

बीबीएमपी अधिकारियों का कहना है कि सर्वे का उद्देश्य सिर्फ यह जानना है कि क्षेत्र में स्ट्रे डॉग्स का वितरण कैसा है और कहां हस्तक्षेप की जरूरत है। लेकिन स्थानीय शिक्षकों का कहना है कि उन्हें इस बारे में आधिकारिक दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं, सिर्फ फॉर्म भेज दिया गया है।

कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि यह फॉर्म सिर्फ प्राइमरी डेटा कलेक्शन के लिए है, यानी अनिवार्य नहीं है। मगर शिक्षक स्पष्ट दिशा-निर्देश चाहते हैं।

क्या शिक्षक वास्तव में कुत्तों की जनगणना करेंगे?

अभी स्थिति थोड़ी अस्पष्ट है।
कई स्कूल प्रशासन का कहना है कि उन्होंने फॉर्म भरे ही नहीं, क्योंकि यह उनका कार्यक्षेत्र नहीं है। कुछ टीचर्स ने कहा कि वे अपनी क्षमता और सीमाओं के हिसाब से बुनियादी जानकारी दे देंगे, लेकिन फील्ड सर्वे नहीं करेंगे।

संभावना यही लगती है कि आगे चलकर:

  • यह काम नगर निगम के कर्मचारी संभालेंगे
  • शिक्षक सिर्फ स्कूल के आसपास की बुनियादी जानकारी देंगे
  • किसी प्रकार की फील्ड विजिट अनिवार्य नहीं होगी

लोगों की प्रतिक्रिया—ह्यूमर भी, चिंता भी

सोशल मीडिया पर इस सर्वे को लेकर मज़ेदार मीम्स भी आए। किसी ने लिखा:

  • “अब शिक्षक बच्चों को A, B, C के साथ-साथ ABC (Animal Birth Control) भी पढ़ाएंगे?”

कई लोग मज़ाक में कह रहे हैं कि शिक्षकों को “डॉग कैचर” भी बना दिया जाएगा।
लेकिन कई नागरिकों ने ये भी माना कि स्ट्रे डॉग मैनेजमेंट जरूरी है, और यदि शिक्षक बुनियादी जानकारी साझा करते हैं, तो इससे पॉलिसी बनाने में मदद मिलेगी।

निष्कर्ष: समाधान संतुलित हो

शिक्षक देश का भविष्य बनाते हैं, इसलिए उन्हें अनावश्यक गैर-शैक्षणिक कामों में उलझाना ठीक नहीं। स्ट्रे डॉग सर्वे जैसी गतिविधियां जरूरी हैं, लेकिन यह जिम्मेदारी नगर निगम, पशु चिकित्सा विभाग और स्थानीय प्रशासन को निभानी चाहिए।

फिलहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि बीबीएमपी इस सर्वे से जुड़े कामों को कैसे सुव्यवस्थित करता है और क्या वास्तव में शिक्षकों को फील्ड में उतरकर कुत्तों की जनगणना करनी पड़ेगी या नहीं।

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